Thursday, 19 January 2012

"सोचकर बोले मायावती" चुना आयोग का करार जवाब


मायावती एक वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें इस तरह के बयान देने से पहले स्वयं सोचना चाहिए  डॉ. कुरैशी ने कहा है कि  उन्होंने साफ कहा कि चुनाव में सभी को प्रचार के समान अवसर देना आयोग का काम है और वह प्रचार में लगे किसी नेता या उसके चुनाव चिह्न के प्रतीकों को खुला रखने की अनुमति नहीं दे सकता।

उत्तर प्रदेश में अपनी प्रतिमाओं व पार्टी के चुनाव चिह्न हाथी को ढकने के आदेश के लिए निर्वाचन आयोग पर निशाना साधने वाली मुख्यमंत्री मायावती को मुख्य निर्वाचन आयुक्त डॉ. एसवाई कुरैशी ने कड़ा जवाब दिया है।


इस बीच, चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री मायावती और बसपा के चुनाव चिन्ह हाथी को ढकने संबंधी अपने फैसले पर फिर से विचार करने से इनकार कर दिया है। इस संबंध में आयोग ने बसपा की याचिका बुधवार को खारिज कर दी।

बुधवार को यहां पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कुरैशी ने कहा कि आयोग चुनाव के समय दफ्तरों व सार्वजनिक स्थलों पर प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्रियों व पार्टी नेताओं के चित्रों को हटाने के निर्देश पहले से देता रहा है। 

यदि कहीं से फोटो हटाना संभव नहीं हो तो आयोग उसे ढकने के लिए भी कहता है। माया के बयान पर कुरैशी ने पलटकर पूछा कि क्या किसी नेता की मूर्ति या उसके दल के चुनाव चिह्न को केवल इसलिए नहीं ढकना चाहिए, क्योंकि वह आकार में बड़ा व देखने में शानदार है?

उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान से बचना चाहिए वरना अन्य दलों के नेता भी सरकारी पार्कों व सार्वजनिक स्थलों पर अपने चुनाव चिह्नों को लगाने की मांग करने लगेंगे। कुरैशी ने पूछा कि उस स्थिति में आयोग क्या जवाब देगा?

उल्लेखनीय है कि मायावती ने उत्तर प्रदेश में अपनी व हाथियों की प्रतिमाओं को ढकने के निर्वाचन आयोग के आदेश को एकतरफा और पार्टी संस्थापक कांशीराम का अपमान करार दिया था।उन्होंने कहा कि चुनाव के समय सभी दलों को समान अवसर सुनिश्चित करना आयोग का काम है और उसने उत्तर प्रदेश में प्रतिमाओं को ढकने के आदेश देकर कुछ गलत नहीं किया है

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